Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin UP : यूपी के शाहजहांपुर में 80 हजार आवेदन निरस्त, एआई तकनीक से खुली पोल
Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin UP :- उत्तर प्रदेश के Shahjahanpur जिले में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) तकनीक के जरिए आवेदनों का सत्यापन किया गया, जिसमें करीब 80 हजार लोग अपात्र पाए गए. इन सभी के आवेदन निरस्त कर दिए गए हैं. यह कार्रवाई जिले में पिछले छह महीनों से चल रहे व्यापक सत्यापन अभियान के बाद की गई है.

जिले में कुल 1.40 लाख लोगों ने आवास योजना के तहत आवेदन किया था. इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने सेल्फ सर्वे के आधार पर अपने मकानों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड की थी. लेकिन एआई तकनीक से जांच के दौरान कई आवेदनों में गड़बड़ियां सामने आईं.
एआई तकनीक से हुआ पहली बार सत्यापन
शाहजहांपुर में पहली बार सेटेलाइट इमेजिंग और लोकेशन ट्रैकिंग के माध्यम से आवेदनों की जांच की गई. आवेदकों द्वारा पोर्टल पर अपलोड की गई मकानों की तस्वीरों का एआई सिस्टम से मिलान कराया गया.
जांच में पाया गया कि कई आवेदकों ने पक्के मकानों की तस्वीरें अपलोड की थीं, जबकि योजना का लाभ केवल कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले पात्र परिवारों को दिया जाता है. एआई सिस्टम ने फोटो और लोकेशन डेटा का विश्लेषण कर ऐसे 80 हजार आवेदनों को अपात्र घोषित कर दिया.
60 हजार आवेदनों का दोबारा सर्वे
कुल 1.40 लाख आवेदनों में से 80 हजार निरस्त होने के बाद शेष 60 हजार आवेदनों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराया गया. यह सर्वे बीडीओ और ग्राम सचिवों के माध्यम से कराया गया. सत्यापन के बाद इन 60 हजार लाभार्थियों का डाटा शासन के पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया है.
अब शासन के निर्देश के अनुसार पात्र पाए गए आवेदकों को आवास की स्वीकृति दी जाएगी.
आवास योजना में कितनी मिलती है धनराशि?
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत पात्र लाभार्थी को कुल 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है. यह राशि तीन किस्तों में दी जाती है—
- पहली किस्त: 40,000 रुपये
- दूसरी किस्त: 70,000 रुपये
- तीसरी किस्त: 10,000 रुपये
इस धनराशि का उद्देश्य ग्रामीण गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है.
सेल्फ सर्वे में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
जिले में 80 हजार लोगों ने सेल्फ सर्वे के आधार पर आवेदन किया था। इसमें मकान की फोटो अपलोड करना अनिवार्य था. जांच में अधिकतर फोटो में पक्के निर्माण दिखाई दिए. एआई सिस्टम ने इन तस्वीरों का विश्लेषण कर स्पष्ट किया कि ये आवेदक योजना की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते हैं.
इस कार्रवाई से स्पष्ट है कि अब योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है.
अधिकारी का बयान
डीआरडीए के परियोजना निदेशक अवधेश राम ने बताया कि पहली बार एआई तकनीक का उपयोग कर आवासों का सत्यापन किया गया. 1.40 लाख आवेदनकर्ताओं में से 80 हजार अपात्र पाए गए हैं, जबकि 60 हजार पात्रों का डाटा शासन को भेज दिया गया है.
निष्कर्ष - Pradhan Mantri Awas Yojana Gramin UP
शाहजहांपुर में एआई तकनीक के जरिए की गई यह कार्रवाई अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकती है. इससे फर्जी और अपात्र आवेदनों पर रोक लगेगी और वास्तविक जरूरतमंदों को ही योजना का लाभ मिल सकेगा. सरकार का यह कदम दर्शाता है कि अब योजनाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है.




